मंदिर के द्वार पर इंतज़ार में बैठी थी माँ
-बाबा केदारनाथ मंदिर के शिखर दर्शन,मंदिर के सामने स्थित नंदी दर्शन से हम उत्साहित थे।उत्तराखण्ड में हिमालय की गोद मे स्थित यह स्थल आत्मिक शांति प्रदान कर रहा था।मंदिर में प्रवेश करने की उत्सुकता थी।
-मुख्य द्वार पर माँ के साथ सपत्निक प्रवेश करने के लिए जा रहा था,पर माँ रुक गई।
मैंने कहा तो उन्होंने कहा कि तुम दोनों जाओ।मैं यहीं द्वार पर बैठूंगी।
मुझे लगा माँ हांफ रही है, इसलिए कुछ देर आराम से बैठना चाहती है।शरीर में रक्त की कमी से यह समस्या उनको अक्सर हो जाती थी।
माँ ने कहा-"तुम लोग दर्शन कर लो,मैं बाद में करूंगी।"
माताजी के बगैर,हम भी दर्शन कैसे कर लेते।
प्रदक्षिणा पथ पर हम लोग मंदिर को निहारने लगे।प्राप्त जानकारी अनुसार हम पांडव वंश द्वारा निर्मित,आदि शंकराचार्य द्वारा जीर्णोद्धार किए कत्यूरी शैली में बने मंदिर का सौंदर्य देख चकित थे।मैं ,स्वयं को बाबा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर, प्राप्त प्रभु कृपा से अभिभूत था।चारधाम दर्शन की योजना के दौरान मेरा ऑपरेशन हुआ था।माँ को एमडीएस बीमारी के चलते खून की कमी रहने लगी थी।इस कारण हर माह दो तीन बॉटल खून चढ़ाना आवश्यक होता था।मेरे ऑपरेशन के 20 दिन बाद,माँ की तबियत के चलते प्रभु दर्शन कल्पना से परे था।
माँ की इच्छा थी,उनके आशीर्वाद से उनके साथ प्रभु के सामने पहुंचे थे।
यात्रा के दौरान लैंड स्लाइडिंग के कारण रास्ते बंद थे।इसलिए हम यहाँ हैलीकाप्टर से पहुंचे थे।हमारे साथ यात्रा में श्री माधव जी पारे,श्री अशोक जी पाराशर,श्री नरेश जी पगारे,श्री संदेश जी पारे सहित 16 सदस्य थे।सबसे पहली ट्रिप में माँ के साथ मैं और पत्नी यहाँ पधारे थे,शेष अन्य ट्रिप में आने वाले थे।बेटा अर्पण एवं अणिमा हमारे बाद कि उड़ान में शामिल थे।
हम अपने सभी साथियों की राह देख रहे।
इधर माँ ,केदारनाथ मंदिर के द्वार पर भजन में लीन थी,बीच बीच मुझसे बेटे बेटी सहित अन्य लोग के यहाँ आने की पूछ लेती थी।
मेरी चिंता माँ के स्वास्थ्य को लेकर थी।माताजी का मंदिर में प्रवेश नही कर, द्वार पर ही रुकना।मेरी समझ से परे था।
केदारनाथ में हुई त्रासदी के बाद यह दूसरा साल था,प्रशासन व्यवस्था में जुटा था,लेकिन मौसम के अनुसार कार्य होता था।उस दिन भी फॉग का अंदेशा था,हम शीघ्र दर्शन कर वापस जाना चाह रहे थे।हैलीकाप्टर द्वारा सभी साथियों के आने का इंतज़ार था।
इधर माँ मंदिर के द्वार पर ही बैठी थी,चिंतावश में उनसे पूछता तो वो कहती-" मैं दर्शन कर लूंगी।"
जाने किस विचार में थी माँ!
समय के बीतते-दूसरी ट्रिप,तीसरी,चौथी ट्रिप में हैलीकॉप्टर से आए साथी हमारे साथ शामिल हो गए थे। उड़ान में बच्चों के शामिल होकर, यहां पहुंचने की राह हम देख रहे थे। हैलीकाप्टर में वजन अनुसार यात्रियों को बाबा के धाम लाया जा रहा था।
बीती रात से बेटा अस्वस्थ था,उसका बेसब्री से इंतज़ार था।
हैलीकॉप्टर से पांचवी ट्रिप मे बिटिया केदारनाथ धाम पहुंची।बेटी को देखकर माँ के चेहरे पर रौनक आ गई थी।
माताजी ने बेटी को करीब बैठा लिया।
-लगभग 2 घण्टे बाद छठवीं उड़ान में श्री अशोक जी पाराशर के स्नेहाशीष में बेटा अर्पण केदारनाथ धाम पहुंचा।
अब हम सभी साथी एकत्रित हो गए थे।
इधर माताजी के करीब बिटिया एवं बेटा पहुंच चुके थे।
अर्पण ने दादी को प्रणाम कर कहा-"चलो दादी दर्शन करते है।"
माँ में गजब की स्फूर्ति आ गई थी।
यह शक्ति, बीमार अवस्था मे उन्हें चढ़ाए जाने वाले रक्त से कही बेहतर थी।
माँ ने बेटे की तबियत का हालचाल लेकर कहा-मैं तुम दोनों के साथ दर्शन की इच्छा लिए भगवान का जाप कर रही थी।तुम दोनों के साथ दर्शन करूंगी,देवो के देव महादेव के।
दादी के दोनों हाथ पकड़कर अर्पण एवं अणिमा ने उठाया।
माँ ने कहा -पोते पोती के साथ प्रभु दर्शन सौभाग्य की बात है,सब आपकी कृपा है भोलेनाथ।
और बेटी -बेटे के साथ माँ मंदिर में प्रवेश कर रही थी।
-माताजी प्रसन्न अवस्था मे बार बार प्रभु के प्रति अपने भाव व्यक्त कर आंख नम कर लेती थी।
अपने पोते पोती के साथ दर्शन की उनकी भावना को मैं प्रणाम कर रहा था।पोते -पोती के साथ माँ के प्रवेश की वह छवि आज भी हृदय में विद्यमान है।
माताजी का यह अतुलनीय स्नेह,मेरे मानस में अंकित है।
हमारे माता पिता के साथ व्यतीत समय की यादें, उनके संस्कार,पग-पग पर हमें सिखाते हैं।
हमारी सभ्यता,संस्कार के रक्षक हमारे बुजुर्ग।
अब तो यादें शेष है।
आज 19 जनवरी 2021 को माताजी की पंचम पुण्यतिथि है।
।।सादर प्रणाम माँ।।
माँ के साथ बिताए पल अनमोल होते है। सुंदर, मार्मिक चित्रण किया गया है। तीर्थ दर्शन सौभाग्य की बात है वह भी परिजनो के साथ। जय भोलेनाथ।
जवाब देंहटाएंजय हो। मां के साथ बिताए पल भूले नहीं जा सकते हैं।बुजुर्गो का सानिध्य सौभाग्य की बात है।उनके आशीर्वाद से ही भगवान के दर्शन होते हैं।
जवाब देंहटाएंसादर नमन।माताजी के साथ,सपरिवार भोलेनाथ के दर्शन ,सब ईश्वर की कृपा है।
जवाब देंहटाएंSadar naman.jai ho.
जवाब देंहटाएंसादर नमन
जवाब देंहटाएंradar mama mataji ko.
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