*राइट क्लिक बनाम ब्राइट क्लिक*
"जरा सरको बाबूजी,अभी यहां दो सवारी और बैठेगी।"ड्राइवर सीट की ओर सरकने का इशारा करते हुए कंडक्टर बोला।
अब क्या हमारे माथे पर बैठाएगा? वैसे ही ठूंस -ठूंस के बैठा रहा है, हमारी मोटर साइकिल पंचर नही होती तो कौन बैठता तेरी गाड़ी में।हद से ज्यादा सवारी बैठा रखी है।कच्ची सड़को का टाइटैनिक जहाज है तेरी चौपहिया।ऑफिस ज्वाइन करने का अलग टेंशन है,जल्दी चल भाई।खीझते हुए बाबूराम ने कहा।
"चिंता ना करो बाबूजी।" सबको बैठा के ले जाएंगे।अभी दचके में सब एडजस्ट हो जाएगी सवारी।अपने एम पी की सड़कें है सवारी को सावधान रहना सिखाती है।सवारी दचके एवं खराब सड़क के कारण पकड़ के बैठती है।सिर्फ हमारी ही गाड़ी चलती है इस सड़क पर।
सिटिंग कैपेसिटी से ज्यादा सवारी है ,तुम्हारी गाड़ी में।ऐसे लबालब सवारी बैठाते हो किसी की जान की परवाह नही है क्या? गाड़ी का बीमा करा रखा है या नही? परमिट ,फिटनेस सब क्या कागजो पर चल रहा है।कोई चेकिंग नही होती क्या? प्रशासन का डर नही है क्या? ,बाबूराम ने एक साथ कई प्रश्न दागे।
फिटनेस,परमिट,बीमा,सिटिंग केपेसिटी तो सेटिंग केपेसिटी पर निर्भर करता है बाबूजी। चेकिंग के समय सूचना मिल जाती है।वैसे भी हम सवारी को बोल देते है कि शहर के बाहर उतारेंगे।ताकि बाद में झंझट नही हो।
हाँ, देश मे समाजसेवी भरे पड़े है आप जरा गाड़ी का स्टैंड छोड़कर गाड़ी चलाओ,सभी आपको सतर्क करते है ना।वैसे ही चेकिंग के समय राहगीर होन बोल देते है -"आगे चेकिंग हो रही है।"हम संभल जाते है।कंडक्टर ने राहगीर होन में शब्द "होन" बहुवचन के लिए प्रयोग किया था।और अभी तक तो भगवान की कृपा से कोई दुर्घटना नही हुई है बाबूजी।पर आप इतनी बातें पूछ रहे हो ?आप यहां नए लग रहे हो? वर्ना सवारी तो जैसे- तैसे बैठ के शहर जाती है बेचारी।
बाबूराम ने कहा-"सही में, जनता मजबूरी की मारी है" तभी तो लटककर गन्तव्य तक पहुंच रही है ,गाड़ी में जवान लटके है,बूढ़े,बच्चे,महिला परिस्थितियों से समझौता कर मील के पत्थरों को पार कर खुशी जाहिर करते है।बाबूराम ने सोचा प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र के बारे में सोचना बेमानी है,जहां वैचारिक प्रदूषण भरा पड़ा हो।
इधर गाड़ी स्टार्ट हो चुकी थी।कंडक्टर और सवारी की आस लगाए आवाज लगा रहा था।
बाबूराम अपने भाई के इंतज़ार में था कि मोटर साइकिल का पंचर सुधर जाए तो ये आफत के सफर से निजात मिले।तभी उसको छोटा भाई आता दिखा।बाबूराम सवारी गाड़ी से उतर गया ।
" बस चल ही रहे है बाबूजी"कंडक्टर बोला।और सवारी गाड़ी धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी ताकि सवारी को ढांढस बंधे।
बाबूराम बोला -मुझे ऑफिस ज्वाइन करना है। तभी पास खड़े छोटे भाई से कहा -चलो जिला परिवहन विभाग, ऑफिस ज्वाइन करना है।
कंडक्टर ने कहा-अच्छा बाबूजी फिर मिलेंगे।
बाबूराम ने कहा-शीघ्र ही।
-अपना मोबाइल निकाल कर उसने सवारी से लवालब गाड़ी की फ़ोटो निकाली।
छोटा भाई बोला- बढ़िया फ़ोटो आई है भैया,एकदम "राइट क्लिक" ।
बाबूराम बोला-ईश्वर करे,जनता के लिए भी हो ,यह "ब्राइट क्लिक।"
छोटा ने चुटकी लेते हुए कहा- भैया आपके लिए है यह ब्राइट क्लिक।अब तो सरकार भी सख्त हो गई है।नया चाला आन पड़ा है।ट्रैफिक नियम का पालन नही तो चालान के लिए तैयार हो जाओ भैया।अरे! भैया फ़ोटो में देखो- जिंदगी की किल किल से परेशान साइकिल पर सवार आम आदमी मशीन से होड़ लगा रहा है,साथ मे बैठी है नन्ही कन्या,शायद बेटी हो उसकी।उसकी शक्ति भी।गरीब पिता की शक्ति।गहरी सांस लेते हुए छोटा बोला-"या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः।"
बाबूराम बोला-ओ! राष्ट्रचिंतक,चल।
(प्रस्तुत चित्र-पत्रिका फेडरेशन ऑफ सोसायटी से साभार)
Sundar chitran
जवाब देंहटाएंबेबस सवारी,सफर में सफर करते लोग,बेख़ौफ़ चालक इस अव्यवस्था पर चित्रण।वाह जी।
जवाब देंहटाएंJai ho.
जवाब देंहटाएंव्यस्था पर कटाक्ष।
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